अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए किसान मंच की अनोखी पहल
उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। किसान मंच की प्रदेश प्रवक्ता कुसुम लता बौड़ाई ने इस मुद्दे पर भावुक और प्रतीकात्मक कदम उठाते हुए अपने खून से पत्र लिखकर सरकार और न्याय व्यवस्था का ध्यान आकर्षित किया है।


कुसुम लता बौड़ाई ने कहा कि अंकिता भंडारी की हत्या केवल एक अपराध नहीं, बल्कि पूरे समाज की आत्मा पर लगा घाव है। उन्होंने खून से लिखे पत्र में मांग की कि दोषियों को जल्द से जल्द कड़ी से कड़ी सजा दी जाए और पीड़िता के परिवार को न्याय मिले।
प्रदेश प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि अब तक की कार्यवाही में ढिलाई और देरी से जनता में गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि जब तक अंकिता को न्याय नहीं मिलता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।


इस अनोखे विरोध प्रदर्शन ने सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। कई सामाजिक संगठनों और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े समूहों ने कुसुम लता बौड़ाई के इस कदम का समर्थन करते हुए इसे “जनभावनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति” बताया है।
अंकिता भंडारी मामले में न्याय की मांग को लेकर उठी यह आवाज़ एक बार फिर सरकार के लिए कड़ा सवाल बनकर खड़ी हो गई है।


कुसुम लता बौड़ाई ने कहा कि “अंकिता की हत्या केवल एक बेटी की नहीं, बल्कि पूरे समाज की अंतरात्मा की हत्या है। जब तक दोषियों को सख्त सजा नहीं मिलती, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।”


उन्होंने खून से लिखे ज्ञापन के माध्यम से सरकार से मांग की कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में त्वरित न्याय सुनिश्चित किया जाए और मामले में किसी भी स्तर पर प्रभावशाली लोगों को संरक्षण न दिया जाए।


प्रदेश प्रवक्ता ने यह भी कहा कि लंबी न्यायिक प्रक्रिया और लगातार हो रही देरी से आम जनता, विशेषकर महिलाओं में गहरा आक्रोश है। यह खून से लिखा पत्र उसी पीड़ा, आक्रोश और न्याय की पुकार का प्रतीक है।
कुसुम लता बौड़ाई के इस संवेदनशील और साहसिक कदम ने सामाजिक संगठनों, महिला समूहों और आम नागरिकों का ध्यान खींचा है। कई संगठनों ने इसे न्याय के लिए एक सशक्त और ऐतिहासिक विरोध बताया है।


अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की यह लड़ाई अब केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की आवाज़ बन चुकी है—और यह आवाज़ तब तक गूंजती रहेगी, जब तक न्याय नहीं मिलता।

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